ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाकर उनकी विकास योजनाओं में जलवायु अनुकूलन के पहलुओं को शामिल किया जायेगा

 


नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2025। नीति आयोग ने ‘स्थानीय विकास योजनाओं में जलवायु अनुकूलन को मुख्यधारा में लाना’ विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य यह था कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाकर उनकी विकास योजनाओं में जलवायु अनुकूलन के पहलुओं को सम्मिलित किया जा सके।


कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, जलवायु विशेषज्ञों, नागरिक संगठनों और विकास कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र बिंदु यह रहा कि पंचायत स्तर पर की जाने वाली योजनाओं में जलवायु अनुकूलन को एक अलग विषय के रूप में नहीं, बल्कि समग्र विकास योजना का अभिन्न हिस्सा बनाकर शामिल किया जाए। यह भी स्पष्ट किया गया कि जलवायु मॉडलिंग को स्थानीय अनुभवों और ज्ञान से जोड़कर ही व्यवहारिक रणनीतियाँ विकसित की जा सकती हैं।


कार्यशाला में पंचायती राज संस्थाओं को जलवायु अनुकूलन के लिए संस्थागत रूप से तैयार करने और स्थानीय स्तर पर योजनाएं बनाने में जलवायु अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि अत्यधिक मौसमीय घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति से ग्रामीण आजीविका, कृषि और जल सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, जिसके समाधान के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर विभाजित आंकड़ों की आवश्यकता है ताकि बेहतर योजना बनाई जा सके।


पंचायतों की क्षमता निर्माण के लिए विभिन्न उपकरणों और रूपरेखाओं की प्रस्तुति दी गई, जिससे वे दीर्घकालिक अनुकूलन की दिशा में ठोस कदम उठा सकें। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि मौजूदा सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ लेकर ग्राम स्तर पर जलवायु सहनशीलता को बढ़ावा दिया जा सकता है।


कार्यशाला में विभिन्न राज्यों और पंचायतों के सफल प्रयासों को प्रस्तुत किया गया, जिससे ‘सहकर्मी से सीखने’ और ज्ञान साझा करने की संस्कृति को बल मिला। जलवायु अनुकूलन से आगे बढ़ते हुए स्थानीय स्तर पर सक्रिय जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया गया, जिसमें पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।


कार्यशाला का समापन बहु-हितधारक सहभागिता की अपील के साथ हुआ, ताकि ग्रामीण आजीविका को जलवायु सहनशील बनाया जा सके। यह भी कहा गया कि पंचायतों के नेतृत्व में नवाचार और संस्थागत क्षमता का विकास भारत को अधिक टिकाऊ और जलवायु-लचीले ग्रामीण विकास की ओर अग्रसर कर सकता है।

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